माता रमाई के आदर्शों पर चलने का लिया संकल
भिलाई : न्यूज़ 36 : भारतरत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पत्नी त्यागमूर्ति माता रमाई की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम का आयोजन 27 मई मंगलवार की शाम कोसा नगर बुद्ध भूमि में किया गया। यहां स्थापित रमाबाई भीमराव अंबेडकर (माता रमाई) की प्रतिमा पर मोमबत्ती अगरबत्ती जलाकर तथा पुष्प अर्पित कर उपस्थित लोगों ने विनम्र आदरांजली अर्पित की। उपस्थित लोगों ने माता रमाई के त्याग का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
बौद्ध कल्याण समिति के अध्यक्ष नरेंद्र शेन्डे ने इस अवसर पर माता रमाई के त्याग साहस और बलिदान को याद किया। भिमाई महिला मंडल की अध्यक्षा दानशीला रामटेके ने कहां कि माता रमाई ने समाज के उत्थान के लिए अपने बच्चों का बलिदान दिया। उनके इस उपकार के लिए आंबेडकरी समाज हमेशा ऋणी रहेगा। सचिव कोमल चंद्रिकापुरे ने कहा कि माता रमाई भारत की प्रथम महिला थी जिन्होंने अपने पति को विदेश में पढ़ने के लिए लकड़ी और गोबर के कंडे बेच कर पैसे भेजें। श्रावस्ती रामटेक ने माता रमाई के द्वारा बाबा साहब को दिए गए संपूर्ण सहयोग का वर्णन किया। माता रमाई के समाज कल्याण को याद करते हुए डॉक्टर उदय धाबर्डे ने अपने उद्बोधन में कहा कि गरीब बच्चों के वसतिगृह (हॉस्टल ) में बच्चों की पढ़ाई और उनके खाने के लिए माता रमाई ने अपने सोने के कंगन दान में दे दिए थे। इस अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।