Saturday, March 14, 2026

कांग्रेस की गुटीय राजनीति भारी पड़ेगी राजेन्द्र साहू की चुनावी संघर्ष पर….

भिलाई : न्यूज़ 36 : भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी घोषणा के बाद आखिरकार कांग्रेस ने भी लोकसभा के लिए अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी पहली सूची में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में राजेंद्र साहू को चुनावी मैदान में कांग्रेस संगठन ने उतारा है । राजेंद्र साहू दो बार कांग्रेस के खिलाफ निर्दलिय चुनाव मैदान में उतरकर कांग्रेस की जीत के रास्ते में आ चुके हैं । पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी होने का यह फायदा मिला कि उन्हें लोकसभा दुर्ग से कांग्रेस प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है, परंतु दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में 9 विधानसभा सीट में से सात विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में है कांग्रेस संगठन में राजेंद्र साहू कितने मजबूत हैं, यह पाटन विधानसभा क्षेत्र के चुनावी परिणाम से साबित हो रहा है। पाटन विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी रहने के बावजूद भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मात्रा 17 से 18000 की जीत राजेन्द्र साहू के संघटक क्षमता को दर्शा रही है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस सरकार के समय राजेंद्र साहू का वर्चस्व सिर्फ इसलिए रहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते थे। वहीं दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय है, कि राजेंद्र साहू की राजनीति उनके व्यापार की बढ़ोतरी का बड़ा सहारा बना। कई छोटी-छोटी बातों पर गुटीय विवाद दुर्ग शहर की जनता ने देखा मात्र एक फ्लेक्स के हटने से जिस तरह से नगर निगम प्रशासन पर एक ऐसे विज्ञापन एजेंसी पर कार्यवाही का दबाव पड़ा की एक ही दिन में निगम प्रशासन को विज्ञापन एजेंसी को निरस्त कर ब्लैकलिस्टेड करना पड़ा । सत्ता की ताकत के आगे सभी नतमस्तक रहते हैं, परंतु अब जब सत्ता नहीं है ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि दुर्ग लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी तरह से राजेन्द्र साहू के प्रत्याशी घोषित होने पर समर्थन करेंगे। ऐसी भी चर्चा है की दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से भिलाई के पूर्व साडा उपाध्यक्ष बृजमोहन सिंह निर्दलीय चुनावी ताल ठोक सकते हैं, वहीं बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र साजा विधानसभा क्षेत्र में जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व बड़ा और ईश्वर साहू की सामाजिक पैठ मजबूत हुई उससे यह भी कहना मुश्किल है, कि राजेंद्र साहू को जाति समीकरण का फायदा मिलेगा देखने वाली बात क्या होगी कि राजेंद्र साहू के प्रत्याशी घोषित होने के बाद राजेंद्र साहू पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी से चुनावी जंग लड़ते हैं या फिर गुटीय राजनीति को खत्म करने और आपसी तालमेल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं । बहुत ही जल्द देश में आचार संहिता लागू हो जाएगी। आचार संहिता लागू होने के बाद नौ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने के साथ-साथ कांग्रेस की अंतर कलह को भी खत्म करने की जिम्मेदारी राजेन्द्र साहू और उनके समर्थकों के बीच रहेगी। वहीं बड़ी बातें है कि 5 साल तक राजेंद्र साहू का पाटन विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा जोर रहा परंतु पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र में कार्य करेंगे ऐसे में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में राजेंद्र साहू को अपने कट्टर समर्थकों के साथ-साथ ऐसे चाटुकारों से भी सावधान रहना होगा जो झूठा आश्वासन देकर प्रत्याशी को गुमराह करते नजर आएंगे ।
जीत की राह मुश्किल है कठिन है, अब इस पर किस तरह से रास्ता बनाते हुए राजेंद्र साहू आगे बढ़ते हैं यह आने वाले चुनावी समर में साफ नजर आ जाएगा।

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