जिले में 50,000 और प्रत्येक पटवारी हल्का में पांच-पांच सौ की जरूरत
दुर्ग :न्यूूूज़ 36 : जिले में 50 हजार ऋण पुस्तिका की जरूरत बताई जा रही है। दिसंबर माह में ऋण पुस्तिका भेजी गई थी। इसके बाद से ऋण पुस्तिका नहीं मिल पाई है। वही ऋण पुस्तिका के लिए पटवारी प्रत्येक तहसील के कानूनगो शाखा का चक्कर काट रहे हैं ।जबकि जमीन की खरीदी बिक्री सहित अन्य कार्यों के लिए ऋण पुस्तिका प्राप्त करने लोग पटवारी और तहसील कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। नए ऋण पुस्तिका के लिए आवेदन करने वाले भी भटक रहे हैं। जिले में करीब डेढ़ महीने से ऋण पुस्तिका को लेकर संकट की स्थिति बनी हुई है। शासन स्तर पर ऋण पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराए जाने से आम आदमी ही नहीं पटवारी भी परेशान है ।शहरी क्षेत्र के प्रत्येक पटवारी हल्का में पांच, 500 ऋण पुस्तिका की डिमांड बनी हुई है। लेकिन ऋण पुस्तिका उपलब्ध नहीं होने के कारण पटवारी को भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है । शहरी क्षेत्र में जमीन खरीदी बिक्री का काम निरंतर चलता है। रजिस्ट्री के बाद खरीददार के नाम पर नई ऋण पुस्तिका बनवानी पड़ती है। जिसका प्रमाणीकरण भी कराना होता है । लेकिन ऋण पुस्तिका के अभाव में प्रमाणिकरण का काम भी बड़ी संख्या में अटका हुआ है। वहीं जमीन का बंटवारा व नामांतरण होने की सूरत में भी नई ऋण पुस्तिका की जरूरत पड़ती है। कुछ आवेदक ऐसे भी हैं जिनकी ऋण पुस्तिका गुम हो चुकी है और वह नए ऋण पुस्तिका के लिए आवेदन किए हुए हैं। जिले में दुर्ग पाटन और धमधा तहसील को मिलाकर करीब 50,000 ऋण पुस्तिका की डिमांड बताई जा रही है । इस संबंध में भू अभिलेख शाखा द्वारा पत्र भी लिखा गया है। भू अभिलेख अधीक्षक आदित्य कुंजाम ने बताया कि राजनांदगांव स्थित शासकीय प्रिंटिंग प्रेस से एक-दो दिन में ऋण पुस्तिका मिलने की संभावना है।
दुर्ग तहसील में 8,000 ऋण पुस्तिका की डिमांड
जिले के दुर्ग तहसील क्षेत्र में 8000 ऋण पुस्तिका की डिमांड की गई है। कानूनगो शाखा में पदस्थ प्रिति भगत ने बताया कि दिसंबर माह में ऋण पुस्तिका उपलब्ध कराया गया था। लेकिन इसके बाद ऋण पुस्तिका नहीं मिली है दुर्ग तहसील में ही 8000 ऋण पुस्तिका की जरूरत है । पटवारी ऋण पुस्तिका की मांग को लेकर आते हैं। उल्लेखनीय की ऋण पुस्तिका की कमी जिले में हर साल देखने को मिलती है। गत वर्ष भी शासन स्तर पर ऋण पुस्तिका समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
